पहाड़ी बटी शहरों कि तर्फ पलायन एक मानवी त्रसदी छ। दशकों बीत ग्येनि वख बटी पाणि-माटी-जवानी तैं उंदु बौगद। पानी अर माटी का पलायन कि बात पर विशेषज्ञ हि एक्सपर्ट जाणकारी य सलाह दे सकदन पर फिलाल मनख्यों (जवानी) का पलायन पर त थोड़ी सि बि समझ रखण वळो एक्सपर्ट बयान दे सकद। वुन द्यखेे जावा त शहरों की तरफ पलायन मात्र उत्तराखण्ड कि त्रसदी नी छ। वैश्विक स्तर पर ग्रामीण अंचलों बटी लोग भैर निकळ्ना छन।
अब उत्तराखण्ड मा परिप्रेक्ष्य मा बोले जाव त रोजगार का अभाव अर बेहतर जीवन की तलाश मा पहाड़ बटी निरंतर पलायन होंद औणू छ। खासतौर पर राज्य बणना बाद पलायन की रफ्रतार ज्यादा हि “वे ग्ये। पलायन आयोग की रपट का मुताबिक पिछला एक दशक का अंतराल मा पांच लाख से जादा लोगुन पहाड़ छोड़ी मैदानों की शरण लिनि। वूं मद्दे करीब एक लाख19 हजार लोग स्थाई रूप से घरबार छोड़ चुकि ग्येनि। प्रकट रूप मा सरकार का वास्ता यो सबसे बड़ी चिन्ता को विषै छ। पर अगर परोक्ष रूप से द्यखे जाव त सरकार का पास यांक वास्ता जबानी जमा खर्च से कुछ ज्यादा नजर नि औणू छ। राज्य का विकासी आंकड़ा कुछ बि बोदा होवन पर धरातल पर ‘‘कुखुडु छ्वटु, भबताट बडु’’ विळ कहावत चरितार्थ होणी छ।
एक अरसा का बाद आशा जगीं छ। कोरोना महामारी का चल्द लोग दिसावर छोड़ी घर वापसी कना छन। आखिर वख रैकि करन बि त क्य। कामधाम ठप छ। उद्योग धन्धों कि सक्रियता शून्य होयीं छ। अब अगर काम हि नि होलु त कार्मिकों कि क्य जर्वत। ये वास्ता लोगुन प्रवास छोड़ी अपण गौं वापसी को विकल्प-अपणैयूं छ। अबि तक गरीब 60 हजार प्रवासी घर ऐ चुकि ग्येनि बल। अर दुन्य भर मा कोरोना कि दैशत से डर्यां बड़ी तादाद मा उत्तराखण्डी मानस घर वापसी का वास्ता बेताब होयूं छ। एक सूचना का मुताबिक प्रादेेशिक, राष्ट्रीय अर अन्तर्राष्ट्रीय रिकार्ड बतौंद कि लाखों उत्तराखण्डी घर वापसी खुण रजिस्ट्रेशन करै चुकि ग्येनि। वो चै कोरोना हि दैशत किलै नि हो मनख्यों खुण तरसदा गौं का आबाद होणै आस त बंधेणी छ।
एक तर्फ भुत्या होंदा प्रदेश का पहाड़ी अंचलों मा मनख्यों कि चहल-पहल कि संभावना जोर पकड़नी छ त हैंक तर्फ प्रदेश सरकार का पास वूंका प्रबंधन अर श्रम शक्ति को सदुपयोग कनै बि एक चुनौती खड़ी होंद जाणी छ। आखिर लाखों लोगु का वास्ता काम, रोजी अर रोजगार पैदा कनु महाचुनौती से कम नी छ। पर यिनु नी छ कि यो सब नामुमकिन हो। बस सरकार अर सरकारी मशीनरी अगर जिम्मेदार भूमिका का मोड मा ऐ जाव त कुछ बि असंभव नी छ। य बात त जगजाहिर छ कि क्वी बि मनखि अपणि जन्मभूमि छोड़ी अणथ जाणु पसंद नि करदो पर समै का दगड़ि चल्नै कोशिश मा नाकाम होणा डर से लोग बेहतर जीवन स्तर कि तलाश मा घर छोड़नो बाध्य होंदना कुछ यिनि स्थिति पैदा होण पर पहाड़ बटी मनख्यों को पलायन होंद जाणू छ। पर आज स्थिति बदलीं नजर औणी छ। मजबूरी का कारण हि सही वो घर वापसी कनू छ। ये हिसाब से प्रदेश सरकार का समणि एक मौका छ पहाड़ तैं आबाद कनौ। बस एक हि चुनौती छ राज्य का विकास मा यीं युवा शक्ति को इस्तमाल कनुक्वे करे जाव।
दरसल एक सूत्री कार्यक्रम यानि घर वापस अयां युवाओं तैं स्थानीय स्तर पर रोजगार देणु सरकार अगर अपणु ध्येय बणै द्या त यो रिवर्स पलायन “वे सकद। घर वापसी अयां युवाओं मा जादातर होटल उद्योग से जुड्यां छन। अबि तक ज्व स्थिति पैदा होणी छ। वो य कि लॉकडाउन खुल्न से कुछ हौर टैम तक वूंतैं घरों मा रूकण पड़ सकद। ये वास्ता अगर सरकार कि तर्फ बटी आर्थिक प्रोत्साहन मिलो त वूंतैं घर मा हि रूकणो बाध्य करे जै सकेंद। सरकारी योजना को मूल उद्देश्य यी छ। पलायन आयोग न सरकार तै सला दिनी छ कि वो ग्रामीण स्तर पर छोटा अर सरलता से क्रियान्वित होण वळा कार्यक्रमों पर फोकस करो। प्रावास्यों कि घर वापसी तैं कैं तरां से रिवर्स पलायन मा परिणित कनौ सरकारी स्तर पर विचार-विमर्श चल्नू छ। पलायन आयोग का अध्यक्ष एसएस नेगी को बोनु छ बल कि अबि तक 60 हजार लोग घर वापसी कर चुकि ग्येनि। वूं मद्दे 30 फीसद लोग घर हि रूकणा इच्छुक छन। वुनै करीब द्वी लाख लोग पहाड़ वापसी खुण पंजीकृत होयां छन। यिनि स्थिति मा अबि य बात साफ नि “वे कि सरकार तै कैं स्तर पर कथगा अर क्य काम कनु होलु।
सरकारी स्तर पर प्रस्तावित योजना- कृषि मंत्री सुबोध उनियाल को बोनु छ कि प्रवास्यों तैं काम उपलब्ध करौणु सरकार कि प्राथमिकता छ। योजना छ कि प्रदेश मा जादा से जादा रिटेल आउटलेट अर अपणु बाजार स्थापित करे जावन ताकि स्थानीय स्तर पर कृषि उत्पादों तैं वख तक पौंछे कि कृषि उद्योगों तैं बजार उपलब्ध करैकि प्रोत्साहित करे जै सको। सरकार कि योजना छ कि बंजर जमीन पर सगंध पादप य एरोमेटिक खेती तैं प्रोत्साहन दिये जाव।
वुनै पूर्व मुख्य सचिव इंदु कुमार पाण्डे को बोनु छ बलकि घर वापस अयां प्रवास्यों का मामला मा स्थिति स्पष्ट होण मा द्वीएक मैना लग जाला। ये बीच जरूरी छ कि लोगु तैं रोजगार उपलब्ध करौणोेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेेे स्वरोजगार का वास्ता मा अनुकूल वातावरण बणौणा अलावा ग्रामीण अर्थव्यवस्था तैं मजबूती देण विळ रणनीति तैं क्रियान्वित कनु जरूरी छ। ये मामला मा जरूरी हि विशेषज्ञ टीम सरकार तैं अपणि रिपोर्ट सौंप देलि।
सरकार कि चुनौती या बि छ कि स्वरोजगार अर स्टार्ट अप तैं बढ़ावा कनुक्वे दिये जाव। नियोजन विभाग को आंकलन बतौंद कि राज्य गठन का बाद बटी अबि तक स्वरोजगार का ग्राफ मा गिरावट दर्ज करे ग्ये। जबकि प्रदेश कि अर्थव्यवस्था मा उद्योग क्षेत्र कि भूमिका मा वृद्धि द्यखे ग्ये। जबकि प्रदेश कि अर्थव्यवस्था मा उद्योग क्षेत्र कि भूमिका मा वृद्धि द्यखे ग्ये। ये हिसाब से अगर लोगु तैं घर मा हि घिरैकि रखणु हो त वख बुन्यादी सुविधों का विस्तार कन पड़लो। किलैकि रोजगार का अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा व्यवस्था मा कमी तैं बि पलायन को कारण मन्ये जांद। अब अगर गौं मा बुन्यादी सुविधों को विस्तार सुनिश्चित नि करे ग्ये त सरकार का तमाम प्रयास बेमतलब अर निरर्थक साबित “वे जाला।