देहरादून। देहरादून शहर स्मार्ट सिटी का युग मा प्रवेश कन वळो छ। शासन स्तर पर यांसेे संबंधित तयारी जोर-शोर से चल्नी छ। नगर निगम कि तर्फ बटी स्वच्छता सर्वेक्षण कि बात बोलेणी छ। पर क्य वास्तव मा हम साफ-सफै का मामला मा जागरूक छां। क्य हम निगम कि सोच को समर्थन कर्दा। अगर हां त ये पहाड़ी शहर मा सफै का लक्षण किलै नि दिखेणा छन। गळी मोहल्लों तैं छोड़ा शहर कि मुख्य सड़क्यों पर बि यि लक्षण नि मिल्ना छन। अब चूंकि निगम प्रशासन ये मामला मा सक्रिय “वे ग्ये पर य बात त अखबारों मा पढ़नौ मिल्नी छ य फिर टाउन हॉल मा मेयर अर पार्षदों का बीच होंदी होलि।
अब जबकि केन्द्र सरकार स्वच्छता का मामला मा अभियान चलैकि संदेश देणै कोशिश कनी छ कि कै बि देश, राज्य य शहर कि पछ्याण वखै सफै तैं देखी पता चल जांद। यांसे हि पता चल्द कि यखा शहरी कथगा जागरूक अर सफै पसंद छन। केन्द्र सरकार बाकायदा राज्य अर जिलावार सफै रैकिंग तयार कन पर लगीं छ। ये मामला मा दून कि रैकिंग क्य होलि। यो हि समै हि बतालो पर फिलाल यिना लक्षण द्यखणो नि मिल्ना छन कि यखा लोग सफै पसंद छन। ये वास्ता निगम अर प्रधानमंत्री कि मंशा का मुताबिक वूंका अभियान तैें सफल बणौणो प्रतिबद्ध छन।
अबि होली मिलन खुण महापौर सुनील उनियाल गामा जी से संक्षिप्त सि बात कनौ मौका मिलि। वूंसे बस यिथगा सि बात पूछि छैे कि अपणु शहर स्मार्ट होण से पैलि सफै का मामला मा फिसड्डी किलै छ। वूंको जवाब छौ कि निगम हर संभव कोशिश कनू छ कि सफाई सर्वे का नतीजा पॉजिटिव आवन। जब वूंसे पुछे ग्ये कि इंदौर चौथा साल बि देशभर का शहरों मा अव्वल औण से हम क्या सीख ल्हेणा छां। वूंन बोलि कि इंदौर महानगर मा सफै कर्मचार्यों अर संसाधनों कि कमी नि होण से वख सफैे कि स्थिति अव्वल छ। गामाजी को जवाब काफी हद तक तार्किक अर स्थितिपरक छौ पर गौर कन लैक बात छ कि इंदौर शहर मा सफै कि कल्चर एक दिन मा विकसित नि “वे। जनकि गामाजी न तर्क द्ये छौे पर यांक वास्ता अगर शुर्वात होणी छ त धरातल पर नजर औण चयेंद।
दरसल निगम सभागार मा बैठक का दौरान पारित अर चर्चित प्रस्तावों व फैसलों कि गर्माहट सिर्फ सभागार का गेट तक हि मौजूद ेरैंद वांक बाद त न पार्षदों तैं ख्याल रैंदो अर मेयर साब यां पर गंभीर नजर औंदा। जबकि होण यो चयेणू छ कि हर पार्षद तैं वेका वार्ड कि जिम्मेदारी सौंप देवन। यांक बाद वार्ड स्तर पर रैकिंग कि व्यवस्था करे जाव। जो बि वार्ड अव्वल औंद वेतैं निगम कि तर्फ बटी अतिरिक्त संसाधन अर प्रोत्साहित कन विळ योजना चलैे जावन।
वास्तव मा सरकार कि योजनों का क्रियान्वयन मा सबसे पैलि शर्त या छा कि सरकार का कर्मचारी अपणु काम ईमानदारी से करन। वांक बाद आम जनता मा चलै जाण वळा जागरूकता अभियान को प्रचार-प्रसार अर वेका फैदा नुकसान को ज्ञान पौंछौणु छ। ये मामला मा अगर राजनीतिक मतभेदों तैं बीच मा नि ल्हये जाव त क्वी वजै नी छ कि योजनों को फैदा आम जनता तक पौंछे जै सकद। येमा सत्ताधारी दल कि हर योजना विपक्ष का वास्ता आलोचना की सामग्री साबित होंद। चै वो नोटबंदी, हो चै आयुष्मान योजना, शौचालै अभियान हो चै घर-घर गैस चुल्हा अर सिलेंडर पौछोणो अभियान भले ही यिना विषै छन कि वूंको विरोध “वे हि नि सकदो पर चूंकि आलोचनात्मक सोच को काम विरोध स्वरूप योजना मा मीनमेख निकळनु। ये वास्ता जरूरी छ कि जनहित कि योजनों पर राजनीति नि करे जाव।
ठीक यिनि केन्द्र सरकार न स्वच्छता अभियान चलैयूं छ त येमा सबि राज्यों कि सरकारों तैं गंभीरता से विचार कैरीे योजना लागु कनौ अगनै औण चयेंद। ये हि उद्देश्य ल्हेकि प्रदेश कि त्रिवेन्द्र रावत सरकार स्वच्छता सर्वेक्षण चलौणी छ। ये मामला मा आम आदिम तैं योजना मा सहयोग देण चयेंद। स्वच्छता सर्वेक्षण दल अब देहरादून न पौंछण वळो छ। वेतैं यख बटी क्य रैबार मिल्द य त बाद कि बात छ पर पैलि हमतैं अपणु वार्ड कि सफै को ध्यान रखण पड़लो। अब अगर वार्ड साफ होला त आम सड़क्यों खुण निगम को विशेष सफै दस्ता बणैकि वेकि जिम्मेदारी तै कन पड़लि।
अमूमन नागरिकों कि आदत घर बटी कूड़ा सड़क य गळी मा घोळ्नै होंद। यांसे मुक्त होण चयेणू छ। अबि दून नगर निगम कि तर्फ बटी जगा-जगा कूड़ादान रखेे ग्ये छा पर जादातर गुमनामी कि स्थिति मा छ। जौंकोे आज तक प्रयोग हि नि “वे सकि। मुख्य सड़क्यूं मा रख्यां डस्टबिन सिर्फ शोपीस बण्यां छन। लोग यूंतैं इस्तमाल कन हि नि चाहंदा। निगम कि कूड़ा-गाड़ी बटी रोजाना बोले जांद कि अपण-अपण घरों मा कूड़ादान रखा ताकि गाड़ी का औण पर वूंमा विसर्जित करे जै सको। फिर बि कुछ लोग सड़क पर कूड़ा कि थैली धोली चल जांदन।
दरसल जब तक सफै कि सोच आमजन मा नि औंदी, स्वच्छता अभियान कामयाब नि “वे सकदो। सरकार य निगम बि अगर दिन मा द्वी दां बि कूड़ा उठान कराव पर जब तक आम नागरिक नि समझलो कि दून हमारो शहर छ येतैं साफ रखणु हमारो कर्तव्य छ तब तक कुछ होण वळो नी छ। जगा सार्वजनिक हो चै सरकारी कखि बि अगर कूड़ा मिल्द त यांखुण सरकार कि जग्वाळ कनै जर्वत नि होण चयेणी छ। खुद हि कूड़ा उठैकि वेकि निर्धारित जगा मा धोळ देण चयेणू छ। सरकारी दफ्रतरों कि हालत हो चै तैसील कैम्पस/दफ्रतर सबि जगा गंदगी अर सफै का प्रति उपेक्षा का भाव नजर औंद। कै सरकारी कार्यालै का दफ्रतर कक्षों का कोणों मा गुटखा कि पीक से लथपथ होयां मिल्दन।
सरकारी दफ्रतरों का शौचालै अर पिछवाड़ों मा कूड़ा अर गंदगी आम रूप से फैली द्यखेे जै सकद। हां यीं कर्मचारी अपण घरों सफै का मामला मा घरवळों पर गुस्सा होंद नजर औंदन। यानि स्वच्छता अभियान कि कामयाबी खुण आम आदिम तैं सहभागी होण पड़लो। यांक वास्ता एक छ्वटु सि उदाहरण देश को स्वच्छतम शहर इंदौर को छ। एक रेस्त्रं मा ग्राहक कुछ जब क्वी आर्डर देंदो त चाय य खाण विळ प्लेटों य कुल्हड़ दगड़ि टिश्यू पेपर बळो रूमाल दिये जांदो छौ। अगर क्वी टिश्यू पेपर पर हाथ पूंजी कूड़ादान का बजाय सड़क मा धोल देंद त क्वी हैंको ग्राहक वेतैें उठैकि कूड़ादान का हवाला कर देंद। यानि वखौ हर नागरिक अपणु शहर साफ रखणो भाव रखद। यी वजै छ कि अबै दां बि चौथी बार वो सफै सर्वेक्षण मा स्वच्छतम घोषित करे ग्ये।
दरसल देहरादून शहर चूंकि ढालान विळ जमीन को छ ये वास्ता अगर एहतिहात बरते जाव त यो शहर इंदेौर तैं मात द्ये सकद। किलै कि बरखा आदि से सड़क्यूं कि मिट्टी अफ्रवी बौग सकद। यांक वास्ता सफै कार्मिकों तैं सिर्फ रोजाना रूटीन से ईमानदारी दगड़ि काम कन पड़लो। तबि राजधानी देहरादून का स्मार्ट सिटी कि पैलि सीढ़ी पार करे जै सकद।
स्वच्छता तैं ल्हेकि कथगा जागरूक छां हम!