पलायन का खिलाफ

देहरादून। पहाड़ बटी निरंतर होण वळा पलायन पर अंकुश लगौणोे सरकार कुछ अलग स्वचण पर मजबूर छ। यांक वास्ता एक कार्य योजना का तहत हर विभाग से सुझाव आमंत्रित कर्या छन। ये मामला तैं अमली जामा पैरोणो मैनो का आखिरी हफ्रता मा मुख्य सचिव विभागवार बैठक आयोजित करला। ये बीच ग्राम्य विकास अर पलायन आयोगन एक 10 सूची सुझाव पत्र सरकार का समणि रखि जैमा एक बिन्दु का मुताबिक गौं कि जो बि विकास योजना बणो बींमा महिलों तैं केन्द्र मा रखे जाव।
ग्राम्य विकास अर पलायन आयोगन जो 10 सूत्री सुझाव पत्र सरकार तैं सौंपि वेमा ग्राम्य विकास से जुड्यां आठ विभागों तैं आदेशित  करे ग्ये कि वो अपण स्तर पर मंथन कैकि विभागवार कार्य योजना सरकार तैें सौेंपन। यानि वो सुझाव प्रस्तुत करन कि वूंका स्तर से आयोग का बिन्दुओं पर क्य काम कर सकदन। औण वळा 25 से 27 नवम्बर तक मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह यूं आठ विभागों  कि अलग-अलग बैठक बुलैकि वूंकी कार्ययोजनों तैं सरकार का समणि रखला।
दरसल प्रदेशे मा पलायन एक अनबूझे समस्या बणी समणि खड़ीे होंयी छ। प्रदेश सरकारों का पास क्वी कारण रणनीति को अभाव छ। नतीजतन पलायन निरंतर होणू छ। यानि जब तक सरकार कि तर्फ बटी क्वी माकूल योजना बणैकि वींतैें ईमानदारी से जमीन मा नि उतारे जांदो सकारात्मक परिणाम मिल्ना मुश्किले छ। यी वजै छ कि राज्य बणना बाद से अबि तक 17 सौ से जादा गौें खाली “वे ग्येनि। य बात पलायन आयोग कि सर्वे रिपोर्ट से समणि आये। रिपोर्ट बतौंदे कि राज्य मा यांसे से जादा गौं यिना बच्यां छन जखै आबादी अंगुळयों मा गिणेे जै सकद। ये मामला पिछली 29 जून खुण पौड़ी मा सम्पन्न राज्य मंत्रिमण्डल कि एक बैठक का दौरान पलायन तैं ल्हेकि गहन मंथन करे ग्ये छौ। तब पलायन आयोग तैें आदेशित करेे ग्ये छौे कि वो पलायन पर अंकुश लगौणोे संबंधित विभागों से कार्ययोजना तयार करैकि सरकार तैं उपलब्ध कराव।
यांक उपरांत आयोगन ग्राम स्तर पर लोगु से सुझाव ल्हेकि एक 10 सूत्री सुझाव पत्र सरकार तैं प्रस्तुत करि। रिपोर्ट मा बिन्दुवार सुझाव छा कि पहाड़ी क्षेत्रें खुण निर्धारित प्रति परिवार मासिक आय पांच से बढ़ैकि 10 हजार करे जाव। गौंखुण बणन विळ विकास योजनों का केन्द्र मा 10 हजार करे जाव। गौंखुण बणन विळ विकास योजनों का केन्द्र मा वखा विकास कि धुरी मुहिलों तैं रखे जाव।
यो कि पेयजल कि उपलब्धता, वन्य जीवों से फसल तैं नुकसान अर पुंगड़ों का दुरूस्तीकरण कार्यो तैं मनरेगा से ज्वड़ेे जाव। पलायन आयोगन सुझाव दिनी कि आजीविका मिशन का तहत ग्रामीणों तैं रोजगारपरक प्रशिक्षण देणो हर गौं मा एक ट्रेनर नियुक्त करे जाव। ग्राम पंचैत्यों तैं विकास कार्य सम्पन्न करौेणोेेे धनावंटने नीति मा बदलाव कर्द आबादी का मानक कम कर्द दूरस्थ क्षेेत्रें का मानकों तैं बढ़ै जाव। आयोग का सुझावों मा बोले ग्येे कि पाणि, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा अर शिक्षा जनि मूलभूत सुविधों पर विशेष फोकस रखे जाव ताकि वखा लोग्वी समणि औण विळ यूं समस्यों को फौरी समाधान करे जै सको। यो कि स्थानीय उत्पादों का विपणने कि व्यवस्था सहकारी समित्यों से जादा नजीक उपलब्ध करै जाव।
पलायन आयोगन सुझाव दिनी कि उद्योग निदेशालै मा पहाड़ वास्ता एमएसएमई को अलग से प्रकोष्ठ गठित कैकि सूक्ष्म, लघु, मंझोळी उद्योगों तैं प्रोत्साहित करे जाव। यांक अलावा राज्य ग्राम्य कार्यक्रम तैं विस्तारित कैकि कौशल विकास पर विशेष ध्यान दिये जाव। आखिरी सुझाव मा बतै ग्ये कि चूंकि रोजगार पहाड़ों मा सबसे बड़ी समस्या छ। ये वास्ता यांसे संबंधित कार्यक्रमों तैं ग्राम स्तर तक ल्हेकि जाणै व्यवस्था सुनिश्चित करे जाव।
पलायन आयोग को यो 10 सूत्री सुझाव पत्र अगला पांच साल मा व्यापक रूप से रोजगार स्टजन कि दिशा निर्धारित कन से जुड्यूं छ। चिन्हित विभागों मा ग्राम्य विकास, पंचैतीराज, सहकारिता एमएसएमई, पर्यटन, उद्यान, कृषि अर पशुपालन महकमा शामिल छन। ये सम्बन्ध मा पिछला मैना मुख्य सचिव स्तर पर विचार विमर्श “वे चुकि ग्ये। अब यूं विभागों मा कार्य योजना तैें अन्तिम रूप दिये जाणू शुरू “वे ग्ये। मुख्य सचिवे कि विभागवार समीक्षा का बाद प्राप्त कार्ययोजनों पर फिर मंथन होलो अर यांक बाद यांतैं सरकार का सुपुर्द कर दिये जालो। यी पूरी कार्ययोजना तैं मंत्रिमण्डल का समणि रखे जालो अर मंजूरी मिल्दै यांतैं धरातल मा उतरणै कवायद शुरू “वे जैलि।
पलायन आयोग को सुझाव पत्र वास्ता मा ग्रामीण क्षेत्रें तैं जादा स्वायतता अर आर्थिक साधन बढौणे से जुड्यूं छ। चूंकि आयोग  का अध्यक्ष एसएस नेगी पहाड़ मा कनक्वे रोके जाव। शैद आयोगे कि मंशा मा बि कि अगर गौं तैं साधन सम्पन्न बणैकि गौं छोड़ी जयां लोगु तैं रिवर्स पलायन खुणे प्रोत्साहित करे जैसको अगर आयोग का सुझावों पर विभागीय स्तर पर ईमानदारी से काम करे जाव त पलायन कि सोच पर प्रहार करे जै सकेंद।