ऊर्जागिरी अभियान 


जनता से जुड्यां विभागों कि मानसिकता  छ कि अगर वूंकि किताब्यों मा वित्तीय घाटा को संकेत मिल्द त वो सीधा आम जनता का खीसा बटी वेतैें पूरो कनौ फरमान जारी कर देंदन। अब चै वो बीएसएनएल हो चै परिवहन विभाग को रोडवेज सिस्टम। डाक तार हो या फिर विद्युत विभाग। पर वो अपणु गिरेबान द्यख्यां बिना हि यिना फैसला ल्हेंद। विभागीय अधिकार्यों तैं पता छ कि जनता बटी पैलि त विरोध का स्वर औण वळा नि छन। अर अगर ऐ बि ग्ये त द्वी-चार दिन हो हल्ला होलो अर वो बि थक हारी किनर “वे जाला। अजकाल उत्तराखण्ड पावर कारपोरेशनेे लिमिटेड (यूपीसीएल) बि यिनि कुछ फैसला ल्हेण वळो छ बल। 695 करोड़ का घाटा मा चल्न वळा यूपीसीएल न विभागीय आमदानी बढौणो तीन लक्ष्य खासतौर पर निर्धारित कर्यां छन। लम्बित बिलों कि वसूली, बिजली, चोरी रोकण अर लाइन लॉस कम कनु अर बिजलीदरों मा बढ़ोत्तरी कनु। ये मामला मा पैला द्वी बिन्दुओं पर त विभाग तैं खास राहत मिल्न विळ नी छ पर तिसरो विकल्प बिना हीला हवाली का लागु “वे जालो। किलै कि अपण देश को उपभोक्ता बिल बढ़ोत्तरी मंजूर कर लेलो पर वो विभाग से यांको औचित्य सिद्ध कनौ नि बोल सकदो। असंगठित क्षेत्र होणा कारण विभाग कि जवाबदेही का मौका कम हि औंदन।वुनै अधिकारी बोना छन बल कि योजना तैं शासन को पूरो समर्थन मिल्नू छ पर यूं तिन्यों मध्य शैद वूंका वास्ता बिजली दरों मा वृद्धि सबसे सौंगों विकल्प साबित होण वळो छ। ठीक रोडवेज कि तर्ज पर आम जनता पर टैक्स बढै कि विभागीय घाटु पूरो कनै सोच  हमरा पब्लिक रिलेशन वळा विभागों कि कार्य प्रणाली पर सवालिया निशान लगै देंद। यूपीसीएल को पैलु लक्ष्य छ बिलों कि बकाया वसूली, विभाग को हर साल योे रोणु रैेंद। वो घाटा पूरो कनौ ये विकल्प पर पूरोे ध्यान देंद पर हासिल कुछ जादा नि औंदो। किलै कि वो बकाया बिल हजारों मा न बल्कि लाखों-करोड़ों मा छन। विभाग सरकारी महकमों से बकाया वसूली खुण पूरा जोर लगै देंद पर अधिकारी स्तर पर मिलीभगत होण से योजना का सकारात्मक नतीजा नि मिल्दा। आज सिर्फ राज्य सरकार अर वींका उपक्रमों पर यूपीसीएल को हजारों करोड़ को बकाया छ पर शैद हि ऊर्जागिरी अभियान को क्वी असर पडलो।