"जागरों मा नाथ पंथी नर्सिंग अर विष्णु औतारी नर्सिंग मा भरम"


"जागरों मा नाथ पंथी नर्सिंग अर विष्णु औतारी नर्सिंग मा भरम"
उत्तराखण्डै संस्कृति मा जागर,घडेला अर तंत्र-मंत्रौ भौत माथम छ। देवी देबता,हंत्या,भूत-प्रेत,मसांण तै नचौणो वूंतै गौबंद करणौ तै गौं य फिर परवारा लोग जागर अर घडेला लगौंणा रौंदन। अलग अलग जागरोन अलग अलग देबता नचये जान्दन,हरेक देबी-देबता अफरा अफरा जागर छन। यूं सब्बी देबतो मा "नर्सिंग" भगवान बी एक छन जू उत्तराखंड मा सब्बी जगो नचये जान्दन। नर्सिंग कुलदेवता, ईष्ट देबता कखी कखी रक्षपाल देबता रूप मा पूजे अर नचये जान्दन। पण सबाल यू छ कै नर्सिंगै पूजा उत्तराखंड मा होंदी छ अर कै नरसिंगा जागर यख लगदा छन।


पौराणिक कथा कान्यो मा नर्सिंग भगवान तै विष्णु भगवानौ अवतार मंण्यु जौंकू अध्धा शरेल बाग़ अर अध्धा शरेल मनख़्यो छौ। यून प्रह्लादै रक्षा करणौ तै अबतार ले छौ, अर यूई नर्सिंग भगवान सैरी दुन्या मा पूजे जान्दन। त क्य यूई नरसिंग भगवाना जागर उत्तराखंड मा लगदन। उत्तराखण्डी इतिहासकार अर जणगुर लिख्वारुं मनण छ जौं नर्सिंग भगवाना जागर यखा लोक मा लगदा छन अर जौं नर्सिंग भगवानै यख पूजा पाठ होंदी छ वू विष्णु भगवाना औतार (अध्धा बागौ मुख अर अध्धा मनखी) नी छन। इतिहासकारुं तर्क छ जौं नरसिंग भगवानै यख पूजा होंदी वूंकू रिस्ता "नाथ सम्प्रदाय" से छ अर यू "गुरु गोरखनाथ ज्या" चेला छन। गुरु गोरखनाथ ज्या चेला नर्सिंगा जागर ही यख लगदा छन न की वैष्णव पंथ वला नर्सिंगा।


नाथ पंथौ असर उत्तराखंडा तंत्र-मन्त्र,जागर अर घड़ेलो मा साफ साफ दिखेंदू। नाथ परथा य नाथ पंथ छट्टि सदया बाद आयी, यांसे पैली बौद्ध,शैव अर वैष्णव सम्प्रदाय यख बस्यां छां। बाद मा नाथ पंथै हाम यख होंण लग्गी ज्यांसे हौर पंथ बी नाथ पंथ मा मिल्दू गैन। उत्तराखंड मा नाथ पंथ नेपाल बटी गढ़वाळ अर कुमौ मा आयी। होंदू करदू गढ़वाळ राजवंश नाथ सिद्धों अर नाथ पंथ से भौत प्रभावित ह्वेन अर नाथ सम्प्रदाय सैरा उत्तराखंड मा फ़ैल गी। नाथ सिद्धवा प्रभावा कारण सिद्ध योगी "नरसिंह देव" तै बावन गढू सुरक्षै जुमेदारी दियेगी। बाद मा "नरसिंह देवन" बावन गढ़ो मा "बावन नरसिंह" अर "पिच्यासी भैरव" सुरक्षा बाना रखेन।"जै नौ नर्सिंग बीर छियासी भैरव जाग,हरकी फैड़ी मा जाग,केदारी गुफ़ों मा जाग"। यूंई गुरु गोरखनाथा चेला य नाथ पंथी नरसिंह देवs वर्णन जागरों मा होंदू छ। "गुरु गोरखनाथ का चेला जाग, पिता भस्मासुर माता माँ काली जाग, लोह खम्ब जाग रतो ह्वे जाई बीर बाबा"।


सबाल यू छ क्य सचमा उत्तराखंड मा पूजे जांण वला नर्सिंग विष्णु औतारी नी ह्वेतै गुरु गोरखनाथा चेला अर नाथ पंथ वला नर्सिंग छन। अर असल मा जागर द्विई नरसिंगो मा कैका लगदन अर कू यख पूजे जान्दन। सबसे पैली जब नरसिंगौ जागर लगदू छ त वेमा नर्सिंगौ सिंगार य लारा-लत्ता पैरणो वर्णन होंदू छ। जू चिन्ह,जू लांणू पैराणू जागर मा बतये जान्दन वू नाथ सम्प्रदाय से मेल खांदन। यूमा "चिमटा,टिमरू सोट्टा,खरुवा झोल्ली,बागम्बरी आसण" जन बन बन्या निसाण बी जागर मा बतये जान्दन। ,"टिमरू कू सोटा जाग,नेपाली चिमटा जाग,खरुवा की झोली जाग..."। नाथ सिद्ध यूं सब्बी चीजो तै अफरी दगड़ी रखदा छन, ज्यान पता लगदू जागरों मा नाथ पंथौ साफ़ साफ़ प्रभाव त छैन्छ त ह्वे सकदो यू नाथ पंथी ई नर्सिंग हो। पण कखी कखी  जागरो मा यूं चिन्हों दगड़ी दगड़ी विष्णु औतारी नर्सिंगौ वर्णन बी कुछ यन होंदू...."पूंछडि लोंफंत आयो,दांतूड़ी खड़कंत आयो, ल्वे चांणा चबंत आयो रे बाबा"....। द्विई नरसिंगौ मा भरम तब हौर बी बढ़ जांदू जब जागर मा सिंगार,वेश-भूसा त नाथ पंथी नर्सिंगै बतये जांदी अर अगनै कथा प्रह्लाद रक्षक वैष्णव वला नर्सिंगै लगये जांदी। "नेपाली चिमटा,नेपाली चिलम जाग रे बाबा....टिमरू को सोट,रोट को भोग.....जन रक्षा प्रह्लाद की कैन तन्नी रक्षा ये घर की कैन रे बाबा"। इन्नी हौर बी कै कारण छन जू द्विई नरसिंगो मा भरम पैदा करदन।


"द्विई नर्सिंगो मा भरम होंणा कारण"


"जूसिमठौ नर्सिंग मंदिर"- जूसिमठ मा ई आदि गुरु शंकराचार्यन नारायणौ ध्यान करी छौ, तब आदि गुरु तै नर्सिंग भगवाना(विष्णु औतारी) दर्शन होंदन। पौराणिक कान्यो मा नरसिंगौ उग्र रूप छ पण यख भगवान शांत रूप मा शंकराचार्य जी तै दर्शन देंदन, बाद मा नर्सिंगौ यूई शांत रूप सब्बी जगा "दुध्या नर्सिंगा" रूप मा पूजे गी। पण येसे अलग एक हौर लोक कथा मा नाथ सिद्ध "नर्सिंग देव" एक बार जोगी रूप मा गढ़ नरेश अजयपालै जननी मू जान्दन। तब रज्जा वखमू नी छौ, राणी जोगी औ भगत करदी अर मान सम्मानौ तै वेतै राजा आसण पै बिठै देंदे। जब राजा वापस औंदू त अफरा आसण पै कै अजांण मनखी देखितै वू भौत गुस्सा ह्वे जान्दो अर वू गुस्सा मा तलवारन वेका बैं हत्थ पै जोर से मरदू। तलवार लगण से नाथ सिद्ध नर्सिंगा हत्थ बटी ल्वे नी निकली तै दूधै धार निकलण लग जांदे। तब बाद मा अजयपाल नर्सिंग देव तै पछंणदू अर जूसिमठौ सरू राज पाट वेतै दे देंदो। बाद मा यूई नर्सिंग "दूध्या नर्सिंगा" रूप मा पूजे गेन । जूसिमठ मा ज्वा मूर्ती छ विंकी बैं हत्थै कलै बी बरीक छ। अब यूं द्वि कान्यो मा भरम छ। अगर वू नाथ पंथी नर्सिंग छन त तब जूसिमठ मा विष्णु औतारी नर्सिंगै पूजा किलै होंदी अर वख ज्वा मूर्ती छ व बी नर्सिंग भगवानै (आधा बाग़ आधा मनखी) किलै छ। अर अगर शंकराचार्य वली बात मंणदा की मंदिर वैष्णव औतारी नर्सिंग भगवानो छ त तब मंदिर मा ज्वा मूर्ती छ विंकी बैं हत्थै कलै बरीक किलै छ जन कथा मा बतये जांदू बल अजयपालन जोगी नर्सिंग देवा हत्थ पै तलवारै मारी छौ।


"नचदी बगत आदेश आदेश शब्द बोलण"– जागर लगौन्दी दां जब कै पै नर्सिंग नचदू छ त नचदी नचदी वू जोर जोर से "आदेश आदेश" शब्द तै बोलणू रौंदू । यू आदेश शब्द नाथ सम्प्रदाय से जुड्युं शब्द छ। नाथ परथा लोग शिवजी तै अफरू "आदि-ईश" मंणदन। नाथ परथा य नाथ पंथ से दीक्षित लोग जब एक दूसरा से मिलदा बी छन त वू "आदेश" शब्द बोल्दा छन। अब सबाल यू छ जब जागरों मा वैष्णव वला नर्सिंग भगवानै य प्रह्लाद अर नर्सिंगै कथा लगये जांदी त तब जै पै नर्सिंग औंदू वू बी "आदेश आदेश" शब्द जोर जोर से बोलणू रौंदू जबकि आदेश शब्द नाथ सम्प्रदाय से जोड्युं शब्द छ। अर हैंकू भरम यू छ प्रह्लाद वली कथा मा बी "दूध्या नर्सिंग" अर "डौंड्या नर्सिंग" औंदा छन अर नचदा छन । यू कुलदेबता य ग्राम देबता रूप मा पूजे जान्दन जबकि दूध्या नर्सिंग अर डौंड्या नर्सिंग त नाथ सिद्ध नौ नरसिंगो मा औंदा छन अर नर्सिंग देवन बावन गढ़ों मा जू बावन नर्सिंग रखी छां वूमा बी यूंकू नौ औंदू छ।


"पश्वा नर्सिंगा हौ-भौ"– एक भरम यू बी छ जब  जागर मा नाथ सिद्ध वला नरसिंगौ बिरतांत सुंणये जांदू त तब जै मनखी पै नर्सिंग नचदू छ वेका हौ-भौ बाग़ य सिंह जन ह्वे जान्दन य वू बागै तरा चर्री हत्थ खूट्योंन चलदू छ अर उन्नी बरताव् करदू। यू सौब लक्षण अर निसाण त विष्णु औतारी नर्सिंगा (मुख बागौ अर अध्धा शरेल मनखी) छन। अगर द्वि नर्सिंग अलग अलग छन त तब गुरु गोरखनाथा चेला वला नर्सिंग तै यन लक्षण अर इन हौ भौ नी कर्यां चयेणन।


"जागरों मा द्विs नरसिंगौ एक्की जगा बिरतांत"– अगर द्विs नर्सिंग अलग अलग छन त तब जागरों मा कखी कखी द्वियोंक वर्णन,लक्षण,चिन्ह,निसाण अर कथा एक्की जगा एक्की रूप मा किलै लगदी। मने कखी कखी जागर मा सिंगार,वेश-भूषा त नाथ पंथी नरसिंगौ छ अर अगनै कथा विष्णु औतारी नर्सिंगै छ। "बावन गढ़ों में जाग,बहत्तर घाटियो में जाग,चौरासी आसणो में जाग,नौ नाथ सिद्धों की ध्यान जाग,गुरु गोरखनाथ को ध्यान जाग...सेळा जोशीमठ मध्ये जोशीरमठ को ध्यान जाग.....हे बाबा पंचनाम देवता तेरु भेज्यो स्वर्ग,हे बाबा भक्त प्रह्लाद तेरु भेज्यो भक्त प्रह्लाद"। इन्नी उत्तराखंडा अलग अलग जगौ मा एक्की जागर मा अध्धा बिरतांत त नाथ सिद्ध नर्सिंग देवौ बतयुं अर अध्धा कथा विष्णु औतारी नर्सिंग भगवानौ होंयु छ, यू सौब चीज द्वियों मा भरम पैदा करदन।


अब सबाल यू छ आखिर द्विs नरसिंगो मा भरम कनक्वे पैदा ह्वे, अर जागरों मा कौं नर्सिंग तै बुलये जांदू अर कैकी पूजा यखा लोक मा होंदी छ। क्य सच मा वू नर्सिंग गुरु गोरखनाथा चेला छन य फिर वू विष्णु औतारी नर्सिंग छन। मेरा हिसाबन नाथ पंथ यख छट्टि सदी बाद आयी, यांसे पैली यख वैष्णव,शैव अर बौद्ध सम्प्रदाय प्रभाव मा छा। राजवंशन जब नाथ सिद्धों से दीक्षा ले त तब बाद मा धीरू धीरू और पंथ बी येमा मिल्दू गैन। नाथ पंथ नेपाल ह्वेतै गढ़वाळ अर कुमौ मा फ़ैली छौ। वे बगत यख वैष्णव पंथ मंणेन्दू रै होलू किलैकि दक्षिण भारत बटी अंया शंकराचार्या अनुयायी यख्खी बसगे छा। वैष्णव पन्था कारण उबरी यख विष्णु औतारी नर्सिंगै पूजा होंदी रै होली। प्रह्लाद वलू जागर बी वैष्णव वली कथा बतौंदी। बाद मा नाथ पंथा प्रभाव से यू लोग बी नाथ पंथ मा मिल्दू गैन ज्यान हम द्वि नरसिंगौ मिल्यु जूल्यु रूप जागरों मा देखदा। दशवी सताब्दी मा नाथ सिद्ध नरसिंह देवन बावन गढ़ों मा बावन नरसिंह अर पिच्च्यासि भैरव नियुक्त कैन। ज्यांसे उत्तराखण्डी साहित्य (मौखिक,पाण्डुलिपि,तंत्र मन्त्र,जागर) पै गैरु असर पोड़ी जू हम इबरी बी देखदा। सैद येई बगत द्वि ई नरसिंगो मा भरम ह्वेगी अर द्वियों तै लोग एक्की मनण बैठ गेन अर धीरू धीरू भरम बढ़दू गै अर जैन जैन जै रूप मा नर्सिंग तै जांणी वेन वे रूप मा नर्सिंगै पूजा पाठ करी अर वेई रूप मा नर्सिंग तै जागरों मा नचै।